कवि कोकिल विद्यापति (दूसरी कड़ी )

Kohbar कवि विद्यापति ने सिर्फ़ प्रार्थना या नचारी की ही रचना नहीं की है अपितु उनका प्रकृति वर्णन भी उत्कृष्ठ है। बसंत और पावस ऋतु पर उनकी रचनाओं से मंत्र मुग्ध होना आश्चर्य की बात नहीं। गंगा स्तुति तो किसी को भाव विह्वल कर सकता है। ऐसा महसूस होता है मानों ह... [पूरी पोस्ट]
writer Kusum Thakur
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[19 Dec 2009 05:04 AM]

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