लौट आई जिंदगी (पलामू चुनाव के बाद)
आज फिर सुबह हुई, निरभ्र खुला आसमान, ठंढी हवाएं, धीमी -धीमी गुनगुनाती हुई। छिट-पुट बादलों से छनकर, सीधे बदन को छूती सूरज की किरनें, पंछियों के कलरव, वातावरण का धीमा शोर, और न जाने कितना कुछ । पर कल ऐसा नहीं था, ये सब कुछ खामोश था , दहशत की चादर में लि...
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Navnit Nirav
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[19 Dec 2009 04:57 AM]



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