जिसके हम मामा हैं ! - चुनावी दाल में व्यंग्य का तड़का
शरद जोशी हिन्दी के उन लेखकों में से हैं जिन्होंने अपनी कलम ऐसे विषयों पर चलाई जिन पर दूसरे साहित्यकारों की नज़र नहीं जाती। इसके लिए व्यंग्य से बेहतर विधा नहीं हो सकती थी और शरदजी के तराशे व्यंग्यों की तीखी चोट आपको न सिर्फ़ परेशान करती है बल्कि झंझोड...
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[14 Mar 2009 08:06 AM]



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