सुनो, तुम्हारी आंखों में मेरे कुछ ख़्वाब पड़े हैं

इसी बहाने मैं जब भी देखता हूं तुम्हारी आंखें थोड़ा डर सा जाता हूं पता नहीं इनमें से कितने , पूरे कर सकूंगा हां , मैं तुम्हारी इन आंखों में हर पल बुनते हज़ार ख़्वाबों की ही बात कर रहा हूं सुनो जो कभी मैं न पूरा कर सका कोई ख़्वाब तुम मुझसे रूठ तो नहीं जाओगी तुम... [पूरी पोस्ट]
writer प्रबुद्ध
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[13 Sep 2009 11:07 AM]

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