हमारी पीढ़ी के लिए शहर 'किरदार' क्यूं नहीं बन पाते ?

इसी बहाने मैं जब भी घर-परिवार या बाहर किसी बड़े से उनके शहर के बारे में यादों की चाशनी में पगी बातें सुनता था तो बड़ा अजीब लगता था। ये सोच कर नहीं कि देखो, इन लोगों को बैठे ठाले कुछ काम तो है नहीं बस गपोड़ बने रहते हैं। अजीब दरअस्ल ये सोच कर लगता था कि हमें अप... [पूरी पोस्ट]
writer प्रबुद्ध
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[02 Oct 2009 09:29 AM]

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