छोटे से जीवन की खातिर
छोटे से जीवन की खातिर कितने ताम-झाम कर डाले आफत-कष्ट-मुसीबत हमने अपनी झोली में भर डाले छाई हैं घनघोर घटायें बादल अब बरसे तब बरसे हम पागल दीवाने बैठे नदी किनारे छप्पर डाले एक शब्द का उत्तर था तुम हाँ कहते या ना कहते पग-पग...
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jogeshwar garg
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[19 Dec 2009 03:23 AM]



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