पुनर्जन्म
पुनर्जन्म मेरे सपनों के शव जब पड़े थे बिखरे आँखों में था रुदन और हर तरफ क्रन्दन निराशा के गिद्ध नोंच रहे थे उनका बदन इक आशा की डोर जो कहीं जुड़ी थी सांसों से बोली वो और फिर टूट गयी "यही नियति है सपनों की और जीवन की अब शवदाह करो" देख...
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[19 Dec 2009 02:40 AM]



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