सड़कछाप आदमी आदमी की बातें

एकोऽहम् जब खुद ही ऐसे प्रपंच करते हैं तो वे झूठ और भ्रष्टाचार का विरोध किस मुँह से करते हैं?’ यह सवाल दाग कर वह चला गया। यह सत्रह दिसम्बर की बात है। उससे तीन दिन पहले, चौदह दिसम्बर को मेरे कस्बे के नगर निगम के चुनावों के लिए मतदान हुआ था। सत्रह को मतगणना हो... [पूरी पोस्ट]
writer विष्णु बैरागी
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[18 Dec 2009 21:44 PM]

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