पप्पू तेल डालता है
बरसों पहले की बात है सो रहे थे पिताजी पप्पू भी उसी कमरे में पर सो नहीं पा रहा था। आवाज आ रही थी उसके पिता की नाक से खर्र खुर्र खुर्रम गर्रम खर्राक झर्राक ठर्राक। पप्पू तब न सोचता न था विचारता कहे को अक्षरश: मानता उसने पिताजी की नाक में डाल दिया इंज...
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अविनाश वाचस्पति
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[18 Dec 2009 17:47 PM]



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