खुद भूखी चिंता दूसरों की रोटी की

shahroz  ka rachnasansaar सब जानते हैं कि भारत गाँव में बस्ता  है.लेकिन अभी-अभी हुए रमाकांत  कथा-सम्मान में राजेन्द्र यादव ने कहा और उचित कहा कि भारत गाँव में जीता नहीं है बल्कि मरता है .और वहाँ भी सब से अधीक दुर्दशा औरत की ही रहती है.खेती-बाडी में मजदूरी करते लोगों... [पूरी पोस्ट]
writer शहरोज़
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[18 Dec 2009 17:32 PM]

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