जुस्तज़ू

Kusum's Journey जुस्तज़ू " जो प्यार मैं करूँ कैसे बगावत करूँ कैसे न उसकी अब मैं इबादत करूँ क्या खता थी मेरी मुझे नहीं है पता किससे शिकवा करूँ क्या शिकायत लब सिले हैं मेरे पर पशेमाँ भी हैं कैसे इज़हार करूँ न शिकायत करूँ जुस्तज़ू थी मेरी जो मुझे मिल गई इक कसक आबरू की ह... [पूरी पोस्ट]
writer Kusum Thakur
views
29
upvote
4
downvote
0
rating
4
comments
12
[18 Dec 2009 10:57 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix