वैसे तो कुछ भी ख़ास नहीं है तेईस दिसंबर को

असुविधा वैसे तो कुछ भी ख़ास नहीं है तेईस दिसंबर को…बस दो साल पहले इस दिन गुजरात में था…मोदी की दुबारा जीत हुई थी और उस दिन के अनुभव के आधार तीन कवितायें लिखी थीं जो आज आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं) गुजरात 2007 (एक) वे अब नहीं बोलते ऊंची आवाज़ में सिर झुकाये... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक कुमार पाण्डेय
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[18 Dec 2009 10:19 AM]

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