ख्वाब का दर
कोई मनुष्य ख़ुद अपने आप को जितना बेहतर जानेगा उतना कोई और नहीं जान सकता। सो मिर्जा ग़ालिब जानते थे दुनियादारी की दिक्कतें और दुनिया के लोगों की चालाकियां-मक्कारियां. इस नश्वर संसार में तख्त-ओ-ताऊस के लिए लड़ते-मरते, इन उपलब्धियों को ही जीवन की सार्थक...
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Pankaj Parashar
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[18 Dec 2009 08:49 AM]



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