मुझे ये फ़र्ज़ लाज़मी है

साहित्य-सहवास द्वार बन्द नहीं है उसका लेकिन मैं खटखटा रहा हूँ क्योंकि उसकी अनुमति बिना भीतर जाने से सकुचा रहा हूँ सकुचाना भी चाहिए , मुझे ये फ़र्ज़ लाज़मी है मैं तो सिर्फ़ आदमी हूँ किन्तु वो बड़ा आदमी है... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[18 Dec 2009 07:42 AM]

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