हमारा शौक़ और काम ऐसा होने का है, कि दूसरों को भी खुशी हो उसमें.
आज अनायास ही मन थोडा अजीब हो गया. एक तो ससुरा जुखाम है कि ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है. और दूसरा ये कि मैं दुनिया में जिस से भी मिलता हूँ उसके पास टाइम की बड़ी ही समस्या होती है. बड़े ही व्यस्त लोगों के बीच में उठना - बैठना है. सौभाग्य है...
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Neeraj Singh
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[18 Dec 2009 06:04 AM]



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