ये शब्द हैं, इनका असर होता है
तोल-मोल कर बोल। भारतीय मनीषा में कुछ भी बोलने के पहले आत्ममंथन करने की हिदायत दी गयी है। क्या हम ऐसा करते हैं? मालिक नौकर को डांटता है, तो उसका सात जनम तार देता है। कुछ लोग बेवजह दूसरों पर दोषारोपण व छीछालेदर में लिप्त रहते हैं। पीठ पीछे इत्ती भद्दी...
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घन्नू झारखंडी
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[18 Dec 2009 03:22 AM]



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