चाणक्य नीति शास्त्र-कुसंस्कारी लोगों का साथ करने से यश नहीं मिलता
अर्थार्थीतांश्चय ये शूद्रन्नभोजिनः। त द्विजः कि करिष्यन्ति निर्विषा इन पन्नगाः।। हिंदी में भावार्थ- नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि अर्थोपासक विद्वान समाज के लिये किसी काम के नहीं है। वह विद्वान जो असंस्कारी लोगों के साथ भोजन करते हैं उनको यश नहीं मिल...
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दीपक भारतदीप
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[17 Dec 2009 23:51 PM]



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