जब से आयें हैं वो ज़िन्दगी में.
ग़ज़ल जब से आयें हैं, वो ज़िन्दगी में. दिल ये लगता नहीं अब किसी में. मौत पानी की लिक्खी थी मेरी, मैं तो डूबा हूँ गहरी नदी में. दिल मचलता है यूँ ही नहीं ये, बात कुछ तो है उस अजनबी में. हमसे प्यासों से कोई ये पूछे, उम्र कैसे कटी तिश्नगी में. अय अँधरो त...
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डॉ.सुभाष भदौरिया.
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[17 Dec 2009 23:50 PM]



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