ज़िन्दगी पर फ़िराक गोरखपुरी के चन्द अनमोल शे'र
मौत का भी इलाज हो शायद ज़िन्दगी का कोई इलाज नहीं न समझने की ये बातें हैं न समझाने की ज़िन्दगी उचटी हुई नींद है दीवाने की गुर ज़िन्दगी के सीखे खिलती हुई कली से लब पर है मुस्कुराहट दिल खून रो रहा है रचयिता : फ़िराक गोरखपुरी प्रस्तुति : अलबेला खत्री...
[पूरी पोस्ट]
AlbelaKhatri.com
48
9
0
9
2
[17 Dec 2009 22:33 PM]



Shuffle








