कोई अकेला तो नही बूढ़ा होता

कवितायन हमारे बीच वो सब था जो कि होना चाहिये जिससे किसी रिश्ते को कोई नाम दिया जा सकता है वो, सब भी था जो बांधे रखता है एक डोर में उलहानों की लालिमा में सजी सुबह से लेकर नाराजियों की उबासियाँ लेती अलसाई दोपहरी / तानों से बोझिल उदास शाम तक और इन सबके बावजूद ज... [पूरी पोस्ट]
writer मुकेश कुमार तिवारी
views
22
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
14
[17 Dec 2009 22:26 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix