कोई अकेला तो नही बूढ़ा होता
हमारे बीच वो सब था जो कि होना चाहिये जिससे किसी रिश्ते को कोई नाम दिया जा सकता है वो, सब भी था जो बांधे रखता है एक डोर में उलहानों की लालिमा में सजी सुबह से लेकर नाराजियों की उबासियाँ लेती अलसाई दोपहरी / तानों से बोझिल उदास शाम तक और इन सबके बावजूद ज...
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मुकेश कुमार तिवारी
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[17 Dec 2009 22:26 PM]



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