वो अफसाना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन..

राजेश गुप्ता आपसे रूबरू दिलकश आवाज़ वाले करण सिंह के रेडियो प्रोग्राम में ये गाना सुनने के बाद कुछ हुआ. एक पल भारी तो अगला पल हल्का. इस उथल पुथल भरे एहसास से निकलने के लिए लिखी ये कविता:- "मेरा ज़िंदगी में कितने लोगों से परिचय है सौ, दो सौ पांच सौ या कुछ हज़ार? ज़्यादातर अच्छे... [पूरी पोस्ट]
writer WindEnergyMan
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[17 Dec 2009 21:31 PM]

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