आंखों में.....

योगेंद्र मौदगिल सपनों का अहसास, जरूरी आंखों में. लम्हा-लम्हा प्यास, जरूरी आंखों में. कस्में-वादे, हया-वफ़ा, रिश्ते-नाते, कदम-कदम विश्वास, जरूरी आंखों में. आएगा, लौटेगा, इक दिन परदेसी, टिकी रहे ये आस, जरूरी आंखों में. निंदक में, आलोचक में है फर्क बड़ा, हरपल ये आभास,... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल
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[17 Dec 2009 18:55 PM]

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