एक और रात - गुलजार
सदाबहार ग़ुलज़ार का 75 वाँ जन्मदिन 18 अगस्त को चुपचाप आकर निकल भी गया । कोई शोर नहीं, कोई हलचल नहीं ! मैं उनके लिये कुछ लिखना चाहता था, लेकिन हज़ार चेहरों वाले ग़ुलज़ार के लिये लिखने का मेरा क़द नहीं, बल्कि ईमानदारी से कहूँ कि ड्राफ़्ट को लगभग पाँच दफ़...
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डा. अमर कुमार
साथियों की कलम
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[24 Aug 2009 21:00 PM]



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