मज़बूत होता जाता रिश्ता

वेबलाग पर... शारीरिक जीवन के इस कैदखाने में आने से पहले हम कहाँ थे और क्या थे ? " " ये समझदार, सँज्ञाशील और शरीर में  बेचैन रहने वाली आत्मायें हमारे शरीर में आने से पहले कहाँ थीं और क्या थीं ? इससे पहले कि ज़माना हमें निरर्थक आवाज़ बना कर दुनिया में... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार

तर्क विवेचन

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[09 Sep 2009 15:11 PM]

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