तीन अलग कवि ..तीन अलग कविताएं ....तीन अलग सोच .......
कुछ कविताएं ऐसी होती है जब लिखी जाती है तो जाने क्या सोचकर .पर जब सामने आती है तो कई लोगो की बन जाती है ..कभी कभी सोचता हूं ...के पियूष मिश्रा क्या .."तुम्हारी है तुम ही संभालो ये दुनिया "के बाद क्या उससे बेहतर लिख पायेगे ..क्या प्रसून जोशी ....तारे...
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डॉ .अनुराग
साथियों की कलम
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[24 Nov 2009 15:39 PM]



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