कोपेनहेगन सम्मेलन‍ - आम जन साधारण के स्वार्थ की बलि

दृष्टिकोण जोर-शोर से शुरु हुआ कोपेनहेगन सम्मेलन, जैसा कि अंदेशा था पूँजीवादी स्वार्थों की भेंट चढ़कर बेनतीजा खत्म होने की कगार पर आ पहुँचा है। दुनियाभर के देशों के जमावड़े के बीच इक्का-दुक्का मुल्क ही ऐसे दिखाई दिए जिनकी चिंताएँ वास्तव में उनके देश के जन-साधार... [पूरी पोस्ट]
writer दृष्टिकोण
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[17 Dec 2009 12:53 PM]

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