अवधी उपन्यास - क़ासिद (10)
आयशा याक दाएं सोचेन कि यू लरिकवा जौनि बात कहि रहा है, वइहमा एहि क्यार मतलबु का है। “ बतइहौ तो नाईं ” ... आयशा तनिक द्यार कइहां हिचकिचानि कि कहूं याक बाह्मन केरे लरिका साथै बातै करेम कौनौ बतंगड़ ना बनि जाए। फिर ना जानै का सोचिक, ऊई अपन हाथु आगे बढ़ा द...
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पंकज शुक्ल
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[17 Dec 2009 12:00 PM]



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