आबिदा परवीन -अब किसी रोज़ न मिलने के बहाने आओ

parul chaand pukhraaj kaa..... कितना कुछ सुना जाता है ....कभी धुन उलझा लेती है ,कभी गीत के बोल तो कभी कलाकार की गायकी ..... पर आबिदा आपा की आवाज़ सुनते-सुनते फितूरी हो जाना अजब सा है . इनमे कुछ फ़ितूर यहाँ दर्ज़ हुए हैं ... कुछ यूँ ही आवारा हो गए ..... रोज़ गुज़रना उस पुल से जिसके न... [पूरी पोस्ट]
writer पारूल
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[17 Dec 2009 10:06 AM]

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