यूँ तमाशा सर-ऐ-महफ़िल तो ना दिखाना था। हाल ऐ दिल!
तुम्हे यूँ लौटकर ना आना था, टूटा हुआ वो ख़्वाब फिर से तो ना दिखाना था, मैं यूँही सब्र कर चूका था ज़ालिम, यूँ तमाशा सर-ऐ-महफ़िल तो ना दिखाना था ।...
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nadeem
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[17 Dec 2009 08:26 AM]



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