पढ़ डाली पोस्टें तमाम : चर्चा सरे शाम (चिट्ठी चर्चा )
देखते देखते ये साल भी बीतने के कगार पर है । और समय कब किसी के लिए रुका है ...रुकना भी नहीं चाहिए ,न ही हमारा ये काफ़िला रुकना चाहिए । हो सकता है कि हमारे विचारों मे समानता न हो , समानता क्या हो सकता है कि हम अपने विचारों के कारण एक दूसरे के धुर विरोधी...
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अजय कुमार झा
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[17 Dec 2009 07:31 AM]



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