फसल से भरा घर खलिहान

GAPODI पहुँच ही जाता हूँ मैं कोई ना कोई बहाना कर के। खलिहान मैं नई फसल है, ओस में रात जलाये गए लकड़ी के धुएं की खुश्बो है । पंची भी दाना खा खे धूप मैं अलसाये पंखो को फुलाए, करीने से साफ़ कर रहे हैं। हम तो रहते नहीं यहाँ बस आते जाते है। जिन लोगों ने मेहनत मशक्... [पूरी पोस्ट]
writer rajkumar jha
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[17 Dec 2009 07:10 AM]

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