शेर हैं कुछ ग़ालिब के

मिर्ज़ा ग़ालिब कोई वीरानी-सी वीरानी है, दश्त को देख के घर याद आया । इसमें दो प्रकार के अर्थ छुपे हैं । यह वीरानी अप्रतिम है । जंगल को देखकर, उसकी वीरानी को देखकर घर की याद आ गयी । दूसरा अर्थ यह है कि जंगल को देखा तो वीरान घर याद आ गया । बिजली सी कौंद गयी आँखों के आ... [पूरी पोस्ट]
writer अनिल कान्त :
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[17 Dec 2009 06:16 AM]

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