परी हूं मैं यहाँ, बस यूँ ही रहने दो मुझे मेरे ही ख्यालों में
परी हूँ मैं" हाँ परी ही तो हूँ ,हूँ पर अपने ही कुछ खयालो में घबराई सकुचाई तनहा हूँ ,किस्मत के अनसुलझे सवालों में ! आफताबी रेशम से बुनती हूँ ,लाखों सुनहरी झिलमिल ख्वाब रहती हूँ तारों में बसे आसमानी शहर के चाँद आशियाने में ! ना सोचो मैं हूँ कौन , कैसी...
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Akanksha
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[17 Dec 2009 03:02 AM]



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