सफर लम्बा है, थोड़ा सामान बाँध लो..........
तेरी संगत मेरी रंगत निखार देती है पर तेरी मुहब्बत अक्सर मुसीबत में डाल देती है क्योंकि ज़माना ढूंढता है बहाना क़त्ल करने का हर तरफ़ धोखा नहीं कोई मौका वस्ल करने का अपनी हस्ती जुदा है अपनी मस्ती जुदा है अपनी बस्ती जुदा है ये कोई और लोग हैं जो जीना नहीं...
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[17 Dec 2009 02:48 AM]



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