एक इंसान हूँ मैं तुम्हारी तरह

हृदय गवाक्ष हरिश्चंद्र श्रीवास्तव जी पूर्णतः दृष्टिहीन हैं। उनकी दवा के पर्चे पर देखकर मुझे पता चला कि उनकी उम्र ७० वर्ष है, अन्यथा मुझे तो ५५ ही लगती थी। और इसके बावज़ूद वो एक दृष्टिबाधित विद्यालय चलाते हैँ। जिसमें कभी ४० विद्यार्थी पढ़ा करते थे। कई बार सोचा था... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान

संस्मरण

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[16 Dec 2009 19:49 PM]

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