तुम सुधर नहीं सकतीं सिंड्रेला...
सर्दी बढ़ रही है...सुधर जाओ सिंड्रेला। ज़रा ख़याल करो। अपने पांव देखो...कितने खुरदरे और रूखे हैं,जैसे कभी कोमल थे ही नहीं। कब तक राजकुमार पर बोझ बनी रहोगी...? खिड़की पर सिर टिकाए, राह देखोगी कि वह आकर तुम्हारा हाल पूछे...? बहुत समय बीता उस बात...
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[16 Dec 2009 12:56 PM]



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