आदमी
आदमी (इंसान नहीं ) आदमी को मार कर खायेगा आदमी एक दिन ऐसा भी अब आएगा आदमी जानवर को मात कर जाएगा आदमी अपना असली रूप दिखलायेगा आदमी बेशरम हो अब ना शरमाएगा आदमी और रब से भी ना घबराएगा आदमी कैसे कैसे ज़ुल्म अब ढाएगा आदमी ज़ुल्म-ओ-सितम की आग बरसायेगा...
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योगेश स्वप्न
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[16 Dec 2009 11:21 AM]



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