खजाना लूटना ही हैं... ग़ज़ल
हमें भी जीवन का खजाना लूटना ही हैं. फिर खुद को मौज मस्ती पे टूटना ही हैं. अब हमें नई जिंदगी जीने की चाह में. गुजरे हुए वक्त पे आज हमें रूठना ही हैं....
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Truth or Dare
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[16 Dec 2009 09:34 AM]



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