प्यार में कायनात प्यारी लग रही है

साहित्य-सहवास आजकी यह रात प्यारी लग रही है आपकी हर बात प्यारी लग रही है चाँद उतरा है ज़मीं पर , आसमां में तारों की बारात प्यारी लग रही है अब नहीं कोई गिला - शिकवा किसी से प्यार में कायनात प्यारी लग रही है क्यों करे परवाह दिल अन्जाम की जिस्म से शुरुआत प्यारी लग रही... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[16 Dec 2009 09:27 AM]

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