आनंद का मतलब सेक्स...?
मीडिया पूरी तरह बाजार में शामिल हो गया है और मीडिया संस्थान दुकान बन गए हैं। पैसे के लिए वे कुछ भी बेचने को तैयार है। संस्कृति और सभ्यता के ठेकेदार बनने वाले इस पर अंधे की भूमिका में बैठे हुए है। वे सिर्फ वेलेन्टाइन डे और फे्न्डशीप डे का ही विरोध करत...
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EDHAR HAI
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[16 Dec 2009 06:16 AM]



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