ज़िन्दगी सपनों के टुकड़े ले, सिरहाने पे रोती है...
ज़िन्दगी सपनों के टुकड़े ले, सिरहाने पे रोती है... घिस रहा बदन, घाव भरता नहीं रिस रहा आँखों से, लहू रुकता नहीं उधड़ने लगे हैं, अब ज़िन्दगी के पैबंद, सीयू इनको तो चुभन होती है... ज़िन्दगी सपनों के टुकड़े ले, सिरहाने पे रोती है... सांस गरल बन सीने में थम...
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मीत
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[16 Dec 2009 04:27 AM]



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