चित्र कविता - 2 (एक ग़ज़ल)

यादों का इन्द्रजाल... Hindi Poetry by Sulabh पिछले दिनों नीरज जी की पोस्ट में यह चित्र देखा था. बहुत कुछ कह रहें है ये सजीव चित्र. इसे देखकर स्वतः ही लेखनी चल पड़ी. हँसते बोलते कहीं खो जाओ ये अच्छा तो नहीं है अपने मन को बस दुखाओ ये अच्छा तो नहीं है मैं जानता हूँ मेरी जाँ मैं तुमसे दूर हूँ बहुत स... [पूरी पोस्ट]
writer सुलभ सतरंगी
views
27
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
13
[16 Dec 2009 00:48 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix