तापसी-उर्मिला
सुभगे उर्मिला तुमने मेरे दिए हुए अश्रु सजा लिए अपनीं पलकों पर निस्तब्ध/नि:शब्द ताकती आकाश को कदाचित मेरे दिए गए अश्रु-उपहार/मेरी अमानत के बिखर जाने के भय से तुम जो निस्तब्ध/नि:शब्द/स्थिर हो सच उर्मिले मन प्राण से तुम्हारा लक्ष्मण आज प्रतिज्ञा औ...
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गिरीश बिल्लोरे 'मुकुल'
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[15 Dec 2009 22:47 PM]



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