कोई चेहरा गाज़र के हलुवे की प्लेट सा लगता है

कवि कोकास सुबह सुबह मुँह खोलो तो निकलती है ढेर सारी भाफ़ ..ऐसा लगता है कोई चाय की केटली रखी हो दिल के भीतर । आलिंगन के लिये बढ़ते हुए हाथ गर्म कम्बल की तरह दिखाई देते हैं , सुबह की गुनगुनी धूप में मफलर से लिपटा हुआ कोई चेहरा गाज़र के हलुवे की प्लेट सा  लगता... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास
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[15 Dec 2009 22:26 PM]

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