घर से घर के बीचोंबीच.....

योगेंद्र मौदगिल इक धमाका सा हुआ जब से नगर के बीचोंबीच. कितनी दीवारें उठी फिर घर से घर के बीचोंबीच. इन दिवारों से कहो अब कानाफूसी बंद हो, हर कदम पर कान हैं अब इस शहर के बीचोंबीच. स्कूली बच्चे ढूंढते रिक्शा में बैठे गौर से, अपना भविष्य फिल्म के हर पोस्टर के बीचोंबीच.... [पूरी पोस्ट]
writer योगेन्द्र मौदगिल
views
24
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
21
[15 Dec 2009 17:31 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix