सन्नाटा
चारों तरफ़ सन्नाटा है हालाँकि शोरगुल भी है नारे भी हैं चीखती-चिल्लाती आवाज़ें भी हैं फिर भी सन्नाटा है इसलिये कि आवाज़ें नहीं उठतीं सबके लिये उठती हैं सिर्फ़ अपने लिये, इसलिये कि कोई आवाज़ नहीं उठती उनके खिलाफ़ जिन्होंने खरीद लिया है सभी की आवाज़ों क...
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mukti
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[15 Dec 2009 15:00 PM]



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