माँगा खुदा से अब न हो रहबर ज़माना मेरा

जीवन के पदचिन्ह माँगा खुदा से अब  न हो रहबर ज़माना मेरा | बस हुआ संगदिल रहनुमाओं से दिल आजमाना मेरा || अपनी अपनी दूकान पर यहाँ सबके अपने रसूल, बिकते मजहब,  बिकती मुहब्बत और बिकते उसूल अश्कों को कीम... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

चिंतन

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[15 Dec 2009 14:15 PM]

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