क्यों भूल जाते हैं माँ को कुछ लोग??

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... कई रातें बीतीं हैं यूँही पलकें झपकते-झपकते, माँ मुझे अपनी गोद में फिर जी भर के सो जाने दे. नींद से अचानक यूँही जाग जाया करता हूँ अक्सर, माँ मुझे रात भर तेरा हाथ पकड़ के सो जाने दे. ये मखमली गद्दा अब मेरे बदन में गड़ने लगा है, माँ मुझे अपने साथ फर्श पे... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

My Poems

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[15 Dec 2009 13:40 PM]

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