मिट्टी को मेरी छूकर कर डाला तूने सोना

साहित्य-सहवास कमाल कर दिया रे धमाल कर दिया रे नज़रे - क़रम से तूने निहाल कर दिया रे अब और क्या मैं मांगूं सब कुछ तो मिल गया है सदियों से बन्द था जो शतदल वो खिल गया है नूरानी कर दिया है भीतर का कोना कोना मिट्टी को मेरी छूकर कर डाला तूने सोना महका दिया है तन - मन महका... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com
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[15 Dec 2009 11:21 AM]

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