इश्क चढ़ता गया

मनोरमा उम्र बढ़ती गयी इश्क चढ़ता गया ख्वाब सजते रहे दिन गुजरता गया उम्र छोटी बहुत जिस्म से प्यार की इश्क आँखों से आकर निखरता गया उलझनों में उलझने की फितरत नहीं प्यार उलझन में फँसकर सँवरता गया चाँदनी रात में कुमुदिनी सो गयी चाँद का जो चमन था उजड़ता गया बात ई... [पूरी पोस्ट]
writer श्यामल सुमन
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[15 Dec 2009 10:18 AM]

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